मेरी प्रियंका आंटी का प्यार

मेरे दोस्त के मदद करने हेतू मैं उसके ट्यूशन के बच्चों को पढ़ाने गया, पर Hindi Sex Stories के इस घटना में मुझे उन बच्चों की माँ की चुदाई का मौका मिलने वाला था..

हैल्लो दोस्तों,

मैं आतिफ लखनऊ से एक बार फिर से हाज़िर हूँ, आप सबके सामने अपनी एक नई कहानी के साथ।

इससे पहले मैं अपनी कहानी पे आऊँ, सभी लड़के अपना लंड हाथ में ले ले, और सभी लड़कियाँ अपनी बीच की ऊँगली चूत में डाल दे..

अब मैं सीधा अपनी कहानी पे आता हूँ, दिखने में स्मार्ट और गुड लुकिंग हूँ और इंजीनियरिंग कर चुका हूँ।

ये कहानी दो महीने पहले की है, जब मेरे सेमेस्टर एग्जाम खत्म हो चुके थे और मैं किसी नई चूत की तलाश में इधर उधर भटक रहा था।

वो कहते है न दोस्तों! कि किसी चीज़ को सच्चे दिल से तलाश करो तो मिल ही जाती है।

हुआ यूं कि मेरा एक दोस्त है अंकित, जो कि अपने खाली समय में ट्यूशन यानि बच्चो को पढ़ाता है।

उस समय मेरे दोस्त अंकित की भी परीक्षा शुरू होने वाली थी और उसे पढ़ने का बिलकुल भी समय नहीं मिल पा रहा था।

एक दिन अंकित मेरे पास आया और बोला की यार आतिफ थोड़ी मुश्किल में हूँ और तेरी मदद चाहिए।

मैंने भी दोस्ती का फ़र्ज़ निभाते हुए पुछा, कि बोल यार क्या बात है?

इस पर उसने कहा, कि मैं दो बच्चों को पढ़ाता हूँ यहीं पास के घर में और अब मुझे समय नहीं मिल रहा उन्हें पढ़ाने के लिए।

ऐसा कर तू उन्हें पढ़ा दे एक महीने के लिए और अब तो तेरी परीक्षा भी खत्म हो गई है और तू खाली भी है इन दिनों।।

मैंने भी दोस्ती के नाते हाँ कर दी और क्योंकि उन बच्चो की भी परीक्षा होने वाली थी तो मैंने हाँ कर दी।

अंकित मुझे उन बच्चों के माँ से मिलवाने ले गया, कि अब से मेरा ये दोस्त ही आपके दोनों बच्चों को पढ़ाएगा।

शाम का समय था, हम दोनों चल दिए और घर पहुँच गए। वो दो माले का घर था, नीचे किराएदार रहते थे और ऊपर मकान मालिक रहते थे।

जहाँ मुझे पढ़ाने जाना था, हम सीधा ऊपर गए और अंकित ने बच्चों को आवाज़ लगाई तो बच्चों की माँ आ गई…

क्या बताऊँ मैं दोस्तों! ऐसी औरत मैंने इतनी करीब से कभी नहीं देखी थी, क्या क़यामत लग रही थी!

माफ़ करना दोस्तों, मैंने उसका नाम तो बताया ही नहीं आप लोगो को, उस देवी का नाम प्रियंका था।

मैं उन्हें प्रियंका आंटी कहता था, तो मैं बता रहा था कि जब वो मेरे सामने पहली बार आई तो मैं तो उन्हें ही घूर रहा था।

क्या मस्त माल थी यार! बहुत गोरी तो नहीं लेकिन साफ़ रंग की थी।

उसके दूध देख के तो ऐसा लग रहा था, कि अभी ब्रा फाड़ के बाहर चले आएँगे और उठी हुई मज़ेदार गांड।

प्रियंका आंटी का फिगर 36-30-34 है, और दिखने में ऐसी कि किसी भी लंड में जान आ जाये।

प्रियंका आंटी थोड़ी लम्बी थी, तो इसलिए और भी ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी।

क्या बताऊँ मेरे दोस्तों, प्रियंका आंटी ने उस समय गुलाबी रंग का गहरे गले का सूट पहना हुआ था, जो बहुत टाइट भी था।

मेरा तो मन बस यही कर रहा था, कि अभी पकड़ के चोद डालूँ इस क़यामत को।

प्रियंका आंटी के घर में प्रियंका, उसके पति, प्रियंका की बुढ़िया सास और दो छोटे बच्चे रहते है।

प्रियंका आंटी ने हम दोनों को अंदर बुलाया और सोफे पे बैठने को कहा।

हम उनके पीछे चल दिए और मेरी नज़रे तो उनकी गांड पर ही टिक गई थी।

आंटी हमारे लिए चाय बना के लाई और जैसे ही हमारे सामने टेबल पे रखने के लिए झुकी, तो मुझे उनकी आधी चूचियों के दर्शन हो गए

अब वो भी मेरी ही तरफ देख रही थी, तो मैंने झट से अपनी नज़रे हटा ली।

अंकित पहले ही मेरे बारे में प्रियंका आंटी को बता चुका था, तो ज़्यादा बात नहीं हुई।

मैंने भी कह दिया, कि मैं रात 8 बजे ही आ पाउँगा उससे पहले मेरे पास समय नहीं है।

इस पर आंटी भी मान गई और कल से ही आने को कहा, मैं दोनों बच्चों से मिला और उनकी पढ़ाई के बारे में पूछने लगा।

प्रियंका आंटी की एक लड़की थी जो कि 12 साल की थी और एक लड़का जिसकी उम्र 10 साल थी।

मैं दोनों बच्चों से मिल के वापस घर आ गया और रात भर प्रियंका आंटी के बारे में ही सोचता रहा।

कैसे इस माल को चोदा जाये और फिर मुठ मार के सो गया। अगले दिन 8 बजे मैं प्रियंका आंटी के घर पहुँच गया।

वो ऊपर रहते थे तो बेल बजाने की ज़रुरत नहीं पड़ती थी, अंकित ने मुझसे कहा था, कि सीधा ऊपर ही चले जाया करो।

मैं दो कमरो के बाद, तीसरे कमरे में जो कि बच्चों का था सीधा वहीँ चला जाता था।

कुछ दिन तो सब सामान्य ही चला और प्रियंका आंटी भी मुझसे रोज़ बच्चों के बारे में पूछती।

वो कभी मेरे बारे में भी पूछती, जैसे मैं क्या करता हूँ और आगे क्या करने वाला हूँ।

वैसे तो प्रियंका आंटी मुझे काफी पसंद आई, वो स्वाभाव से भी बहुत अच्छी औरत थी।

मुझे अक्सर चाय पिलाती और मेरी एक शिकायत पे अपने बच्चों को मारने भी लगती थी। हालांकि, मैं भी बच्चों को बचाने के लिए बीच में आ जाता।

जिससे प्रियंका आंटी की कभी गोल मटोल दूध हाथ लगते, तो कभी आंटी की गांड पे मेरा हाथ पड़ जाता।

प्रियंका आंटी के पति एक प्राइवेट नौकरी करता था। जो सुबह जाते और रात में देर से दारु पी के आता था, कभी कभी तो शाम में ही आ जाता था।

साला शकल से ही बेवड़ा लगता था और वो अक्सर प्रियंका आंटी से दारु के नशे में लड़ाई भी करता था।

उसकी आवाजें मुझ तक साफ़ सुनाई देती थी, जब मैं बच्चों को पढ़ा रहा होता। मैं समझ गया था, कि इन पति पत्नी में अब प्यार खत्म हो चूका है।

कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा, मैं प्रियंका आंटी को मौके मौके से घूरता और छु भी लेता लेकिन कोई बात नहीं बन रही थी।

एक दिन मेरी ऊपर वाले ने सुन ली, हर बार की तरह मैं उस दिन भी सीधा ऊपर आंटी के घर चला गया।

जैसे ही अंदर गया, तो दूसरे कमरे में जो कि बच्चों वाले कमरे से ठीक पहले है। वहाँ प्रियंका आंटी खड़ी और उनकी पीठ मेरी तरफ थी।

वो सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में थी और अपना ब्लाउज पहन रही थी, मेरी आँखे फटी की फटी रह गई!

इतना ज़बरदस्त माल! मेरे सामने था, वो भी आधे कपड़ो में और मैं चूतियों की तरह सिर्फ खड़ा देख रहा था।

क्या जिस्म था प्रियंका आंटी का, मेरा लंड लोहे की तरह खड़ा हो गया और सलामी देने लगा।

तभी प्रियंका आंटी पीछे मुड़ी तो मैं जल्दी से बच्चों के पास चला गया। उस रात मैंने प्रियंका आंटी के बारे में सोच के तीन बार मुठ मारी और फिर सो गया।

प्रियंका आंटी भी मेरी इन सब हरकतों की वजह से समझ गई थी लेकिन कुछ कहती नहीं थी।

कुछ दिनों बाद, मेरी किस्मत का ताला खुला। मुझे उस दिन थोड़ी देर हो गई जाने में और करीब 9 बजे मैं प्रियंका आंटी के घर पहुँच गया।

बच्चों के कमरों में जा के बैठ गया तभी प्रियंका आंटी आई, क्या माल लग रही थी उस दिन!

प्रियंका आंटी ने उस दिन काले रंग का स्किन टाइट सूट पहना हुआ था और उनकी जवानी उसमें से साफ़ झलक रही थी।

आंटी की ऊपर से थोड़ी चूचियाँ भी दिख रही थी तो मेरी नज़र सीधा वहीँ चली गई।

तभी प्रियंका आंटी ने मुझसे कहा, कि आतिफ जी माफ़ कीजियेगा लेकिन बच्चे आज अपनी दादी के साथ अपनी बुआ के घर चले गए और कल सुबह ही आ जाएंगे।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, मैं कल आ जाता हूँ!

प्रियंका आंटी ने मुझसे कहा, कि चाय पी के जाइयेगा और रसोई जा के चाय बनाने लगी।

मैं बैठ के अपना खड़ा लंड सहला रहा था, कि आंटी चाय ले के आ गई और हम दोनों चाय पीने लगे।

दोस्तों मैं आप सबको बता दूँ, कि जब मेरा लंड पूरी चरम सीमा पर होता है। मतलब जब खड़ा होता है तो पैंट में साफ़ पता चलता है।

प्रियंका आंटी चाय पी ही रही थी, कि उनकी नज़र मेरी पैंट पर पड़ी और उनकी आँखें बड़ी सी हो गई।

उन्होंने अपनी नज़रे घुमा ली फिर हम बच्चों की और इधर उधर की बात करने लगे।

तभी मेरी नज़र प्रियंका आंटी के हाथ पर पड़ी, जहाँ एक गहरी चोट का ताज़ा निशान था।

मैंने झट से प्रियंका आंटी का हाथ पकड़ा और पूछा- आंटी आपको ये चोट कैसे लग गई।

प्रियंका आंटी ने अपना हाथ मुझसे छुड़ाया और उनका चेहरा उतर गया और वो उदास सी हो गई।

मैंने उनको सॉरी बोला और जाने लगा।

आंटी मुझसे बोली, कि नहीं आप क्यों माफ़ी मांग रहे है, आपने थोड़ी न कुछ किया।

ये तो मेरे पति ने किया है, कल रात शराब के नशे में उन्होंने मुझे मारा और फिर प्रियंका आंटी रोने लगी।

मैंने भी मौके का फ़ायदा उठाते हुए, प्रियंका आंटी के बगल में बैठ गया और आंटी के कंधे पे अपना हाथ रख के दिलासा देने लगा।

धीरे धीरे प्रियंका आंटी का कन्धा सहलाने लगा, प्रियंका आंटी भी मुझसे बिलकुल चिपक के बैठी थी।

तभी मैंने प्रियंका आंटी के गाल पे किस कर दिया और आंटी ने भी एक गहरी सांस ले के अपनी आँखें बंद कर ली।

अब मुझे ग्रीन सिग्नल मिल चुका था, मैंने अपना एक हाथ प्रियंका आंटी के जाँघों पे रख दिया।

अब दूसरे हाथ उनके सर के पीछे ले गया और अपने होंठ प्रियंका आंटी के होंठ से मिला दिए और आंटी की सिसकिया निकल आई उम्म!

10 मिनट तक, मैं प्रियंका आंटी को किस करता रहा और अब वो भी मेरा साथ देने लगी थी।

मैं अपना एक हाथ उनके चूची पर ले गया और ज़ोर से दबा दिया, कि आंटी के मुँह से ज़ोर से सिसकियाँ निकलने लगी आआह! उउम!

तभी आंटी ने अपनी आँख खोली और मेरी तरफ देखने लगी और मुस्कुरा भी रही थी।

मुझसे बोली, कि आतिफ, आई लव यू! और मुझे लिप किस करने लगी।

मैंने भी आई लव यू टू! कहा और किस करने लगा, कि तभी प्रियंका आंटी रोने लगी और कहने लगी की मैं प्यार को तरस गई हूँ।

दोस्तों, प्रियंका आंटी की चुदाई मैंने किस तरह की, इसके लिए अगले भाग का इंतज़ार करें!