मेरी माँ शबाब बन पापा के साथ तीन लौड़े और लेती

दोस्तों ये कहानी बहुत पुराणी है लेकिन जब ये सब हुआ था तो मैंने कभी किसी से शेयर नहीं किया और उस समय बहुत बुरा भी लगता अब मन थोडा एडल्ट हो गया हूँ तो मेरी समझ में आ गया की लोग बस एन्जॉय करने के लिए कितना कुछ करते है. आज की ये हिंदी सेक्स स्टोरी मेरी माँ की गैंगबैंग चुदाई की है जिसने पढ़ने के बाद आप सभी को मजा आने वाला है. कहानी शुरू होती हैं, बरामदे में खड़ी हुई मेरी माँ सब्जी काट रही थी. मैं वही पर बैठा हुआ अपने असाइनमेंट को करने में लगा हुआ था. निचे से बाबा की आवाज आई और साथ में नीरज, शोहेब और प्रमोद अंकल भी थे. वो चारों बड़े अच्छे दोस्त हे और एक ही कंपनी में काम करते हे. माँ नाइटी में थी. बापू के आते ही माँ ने सब्जी काटना बंद कर दिया और वो खड़ी हुई. निचे से चारों ने ऊपर माँ को देखा. माँ ने स्माइल दी.

बाबा बोले, निचे आ जाओ सीमा.

माँ: अभी आई जी.

माँ ने मुझे अपने बटवे से 20 का नोट दिया और बोली, जाओ अपने दोस्तों के साथ खेलने जाओ.

मैंने कहा, माँ मुझे पढ़ना हे.

माँ: फिर एक काम करो पड़ोस में अपने दोस्त अपूर्व के घर चले जाओ, वही पढ़ लेना. निचे पापा और उन्के दोस्त आये हे तो पढाई में मजा नहीं आएगा.

मैंने कहा वो लोग निचे हे और मैं ऊपर फिर क्या प्रॉब्लम.

माँ: बाप रे तू बड़ी जबान चलाता हे सामने मेरे, पापा को बताऊँ!

पापा के डर की वजह से मैं अपने बसते को बंद कर के माँ से पैसे ले के निकल गया. निचे कमरे में देखा तो कुर्सी के ऊपर चारों दोस्त बैठे हुए थे. बिच में मुर्गी की टाँगे यानी की चिकन लेग पिस और बियर की बोत्ल्स पड़ी थी. बियर एकदम चिल्ड थी जिसमे से धुंआ सा निकल रहा था. मैंने घर से निकलते हुए इतना ही सुना: सीमा डार्लिंग आ गई हे, अब शराब शबाब और चिकन कबाब एक जगह हुआ!

मुझे पहले लगा की शायद मेरे सुनने में कोई गलती हुई हे. लेकिन मैं वही सुना था. तो इसी लिए माँ मुझे घर से भगाने में लगी हुई थी. बाप रे पापा के तिन दोस्त क्या इसलिए ही हर हफ्ते एकाद बार ऐसी शराब की महफ़िल जमाते हे हमारे घर में?

बहुत सारे सवाल एक साथ मेरे दिमाग के अन्दर चल रहे थे. मैंने सोचा की आज तो पक्का तहकीकात करना ही पड़ेगा. मेरे मेईन गेट से निकलते ही माँ ने घर का दरवाजा आ के बंद कर दिया. मैं अपूर्व के घर गया तो वो नहीं था. आंटी को कहा तो वो बोली, तुम ऊपर जा के पढो वो आता हे तो मैं भेज देती हूँ.

मैं अपूर्व के उपर वाले कमरे में गया. तभी मुझे आइडिया आया की अपूर्व की छत से अपने घर कि छत पर जाऊं और फिर निचे जा सकता हूँ मैं. मैंने बस्ता वही रख दिया और छत के रस्ते अपने घर में उतर गया. निचे के कमरे से आवाजें आ रही थी.

मैं सीढियों के ऊपर आ के छिप के वहां बैठ गया. माँ, पापा और वो तीनो चिकन के लेग पिस खा रहे थे. माँ के लिए भी बियर का एक ग्लास भरा गया था. और वो भी पी रही थी. तभी बाबा ने माँ स कहा, डार्लिंग गाने साने तो बजाओ. दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पे पढ़ रहे है।

नीरज अंकल: हां और थोड़ी अपनी पिछाड़ी को भी हिला के दिखाई.

प्रमोद अंकल: सीमा को नंगा नाचते देख के ऐसा लगता हे की वो अरब बेली डांसर हो.

माँ ने लेग पिस वाले हाथ से ही प्रमोद अंकल को कंधे पर एक मार दिया. माँ फिर खड़ी हो के गाने लगाने लगी टीवी के ऊपर. एक चेनल के ऊपर फाट म्यूजिक चल रहा था. माँ ने डांस चालु कर दिया. माँ ने नाचते हुए अपनी नाईटी को ऊपर किया और जल्दी से अपने बूब्स की झलक दिखा दी. माँ के बूब्स वापस नाइती में ढंक गए. शोहेब अंकल अपने लंड को मसलने लगे. और पापा ने मेरी माँ को अपनी तरफ आने को इशारा किया. जब माँ आई तो बाबा ने अपनी कमर से अपने बदन को ऊपर किया. माँ निचे झुकी और उसने बाबा की ज़िप खोल दी. बाबा के लंड को उसने अपने हाथ से बहार निकाला. प्रमोद अंकल ने भी माँ को हाथ पकड़ के खिंच लिया अपनी तरफ. माँ ने उन्के लंड को भी बहार की हवा खिलाई. नीरज और शोहेब अंकल अभी बियर पिने में ही लगे हुए थे.

माँ ने अब धीरे से अपने हाथ में बाबा का और दुसरे हाथ में प्रमोद अंकल का लंड ले लिया और वो उसे हिलाने लगी. देखते ही देखते दोनों के लंड एकदम कडक हो गए. बाबा ने माँ के माथे को पकड के उसे अपने लंड के ऊपर झुका दिया. माँ बाबा के लंड को चूसने लगी और वो प्रमोद अंकल के लंड को पकड के हिला रही थी. शोहेब और नीरज अंकल ने तो अपनी पेंट के साथ साथ बाकी के कपडे भी खोल दिए और वो भी गाने सुन के नाचते हुए माँ के पीछे आ गए. नीरज अंकल ने माँ के बड़े कुल्हे दोनों हाथ से पकड़ के खोल दिए. मैंने माँ की गांड का होल देखा जो एकदम डार्क था. नीरज अंकल ने अपने हाथ से माँ की चूत को टच किया और माँ ने एकदम सेक्सी टोन में आह कर दिया.

अब माँ ने प्रमोद अंकल के लंड को मुहं में और बाबा के लंड को हाथ में ले लिया. माँ के हाथो में और मुहं में जैसे जादू था दोनों लंड एकदम कडक हो गए थे. पीछे नीरज और शोहेब अंकल माँ के कूल्हों के ऊपर हाथ फेर रहे थे और अपने लंड भी वहां घिस रहे थे. माँ की नाइटी को अब बाबा ने अपने हाथों से उतार दिया. और अंदर की जो ब्रा और पेंटी भी उसे चारों ने मिल के उतारा. प्रमोद अंकल ने तो मेरी माँ की पेंटी को अपने लंड के ऊपर ही लपेट लिया और वो मुठ मारने लगे पेंटी के अन्दर. शोहेब अंकल ने अब मेरी माँ के बड़े बूब्स को अपने हाथ में भर के दबा दिए.

बाबा बोले: चल नीरज तू आगे आजा मैं पीछे!

प्रमोद अंकल: तो हम क्या हिलाएंगे ही यहाँ बेन्चोद!

माँ: आप लाओ मैं मुहं में ले लेती हूँ. और शोहेब आप का हिला देती हूँ.

बाबा माँ की गांड के पास खड़े थे. नीरज अंकल निचे लेट गए. माँ ने अपने हाथ से उन्के लोडे को चूत पर सेट कर दिया. और फिर वो उसके ऊपर बैठ गई. माँ की चूत में नीरज अंकल का लंड ऐसे घुस गया जैसे कुछ हुआ ही ना हो. बाबा ने खड़े खड़े अपने लंड को थूंक से चिकना कर दिया. और फिर उन्होंने अपने लोडे को माँ की डार्क गांड पर लगाया. माँ की कमर को पकड के एक झटके में बाबा ने लोडा गांड में कर दिया.

माँ की चूत और गांड के अन्दर एक ही टाइम पर दो दो लंड चुसे हुए थे. शोहेब अंकल माँ के पास आ गए. और माँ ने उन्के लोडे को पकड़ के हिलाना चालू कर दिया. प्रमोद अंकल ने पेंटी को सुंघा और फिर माँ के पास आके अपने लोडे को मुहं में दे दिया. मेरी माँ कीसी इंग्लिश पोर्नस्टार के जैसी लग रही थी. उसके सब अंग पर लंड की असर थी.

नीरज अंकल के हिस्से में कुछ ज्यादा करने को आया नहीं था. बाबा जोर जोर से धक्के लगा के अपने लंड को माँ की गांड में कस कस के अन्दर बहार कर रहे थे. और उसकी वजह से माँ की कमर आगे पीछे होती थी. तो नीरज अंकल का लंड भी उसके साथ हिलता था.

पांच मिनिट तक माँ ने प्रमोद अंकल के लंड को मुहं से बहार निकाला हु नहीं. वो लंड चूसते हुए चुदवा रही थी. फिर प्रमोद अंकल ने जब लंड को माँ के मुहं से निकाला तो वो पूरा लाल हो गया था. प्रमोद अंकल ने लंड को इसलिए मुहं से निकाला की वो झड़ना नहीं चाहते थे. शोहेब अंकल के लंड को हिलाते माँ अभी भी चुद रही थी दोनों छेदों में.

तभी बाबा के मुहं से अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह की आवाजे निकल पड़ी. और उन्होंने जब लंड को बहार निकाला तो उसके अन्दर से वीर्य छटक पड़ा. माँ की गांड के ऊपर ही बाबा ने सब वीर्य छोड़ दिया. फिर बाबा साइड में हो गए. अब प्रमोद अंकल ने लंड को हिलाते हुए माँ की नाइटी से गांड को साफ़ किया. फिर थूंक लगा के वो माँ की गांड मारने लगे.

निचे नीरज अंकल की साँसे भी उखड़ रही थी. उन्होंने अपने दोनों हाथ से माँ के बूब्स मसले और फिर निचे से वो अब जोर करने लगे थे. माँ किसी रंडी के जैसे अपने पुरे बदन को झटके लगा लगा के चुदवाने बीजी थी.

प्रमोद अंकल का लोडा बाबा से काफी बड़ा था और वो जब गांड में पूरा घुसता था तो माँ उछल सी जाती थी. लेकिन फिर भी उसके मुह से दर्द की आवाजे तो नहीं निकली. मैं शायद ये सब पहली बार देख रहा था लेकिन माँ और इन चारों के लिए तो ये सब जैसे एकदम नार्मल था. कोई हल्ला गुल्ला नहीं. सब एक दुसरे के साथ मिल के मजे से एक दुसरे का पानी छुडवाने में बीजी थे बस.

प्रमोद अंकल ने पांच मिनिट और गांड मारी और फिर उनका भी छुट गया.  शोहेब अंकल ने माँ के मुहं में लंड दे के चुसाया. और फिर प्रमोद अंकल का हो गया तो वो नीरज अंकल को बोले, अबे साले तेरा पानी क्यूँ नहीं निकल रहा हे आज.

नीरज अंकल बोले आज दोपहर को ही मेरा पानी निकला हे भाइयो. दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पे पढ़ रहे है।

शोहेब अंकल बोले, तू सीमा की गांड में डाल दे तो पानी जल्दी निकलेगा. साले कब से चूत को अपनी बना के बैठा हुआ हे.

नीरज ने अपने लंड को चूत से निकाला. उसका लंड काला था और माँ की चूत का पानी लगने से वो चमक रहा था. माँ शायद दो तिन बार तो झड़ी ही होगी इन लोगों  से अब तक चुदवा के! अब शोहेब अंकल निचे लेट गए और माँ की चूत मारने लगे. और नीरज अंकल ने माँ की गांड को चोदना चालू कर दिया.

दोस्तों इसके बाद भी माँ की चुदाई पूरी 20 मिनिट तक चली. माँ ना थकी ना उसने कोई ऐसी बात कही की जिस से लगे की वो थक गई हो. चारों के लंड को ठन्डे कर के वो नंगी ही सब के लिए चाय बनाने चली गई. और मैं छत के रस्ते से ही अपूर्व के घर की तरफ चला गया. मैं जाते जाते यही सोच रहा था की बाबा की ऐसी क्या मज़बूरी थी की वो माँ को रांड बन के अपने दोस्तों से चुदवा रहे हे! (दोस्तों मुझे बाद में वो बात पता चली थी और वो कहानी मैं आप को जल्दी ही लिख के भेजूंगा!).