मजबूर कामवाली और बूढा लंड

सुनैना की उम्र ही क्या हुई थी अभी तो! मम्मी जिस घर में काम करती थी उसी घर में उसकी नानी ने भी काम किया था, तिन पीढ़ी से मालिक और नोकर का रिश्ता जैसे चला आया था. सुनैना को तो याद नहीं लेकिन वो छोटी सी चड्डी पहन के अपनी माँ के साथ इस घर में काम कर चुकी थी.

और अब वो स्कर्ट छोड़ के साडी पहनती है. कमर पतली है उसकी आँखे काली और ये कामवाली बड़े बालवाली है. और जब भी वो काम के लिए घर में आती है तो उसके दिल में एक डर सा रहता हैं.और उसकी वजह हैं घर का बूढा शंकरलाल. शंकर उम्र में सुनैना के दादा जितना है. लेकिन उसका लंड और दिल इस कामवाली की जवानी के ऊपर आया है.

देखने में तो वो बड़ा धार्मिक हैं और सुनैना को बेटा बेटा कह के ही बुलाता है. लेकिन उसके दिल में एक खोट है और उसने दो तिन बार सुनैना को पकड़ के चोदा है. पहली बार तो सुनैना की चूत से इतना खून निकला था की ये बूढा खुद भी बहुत डर गया था. लेकिन फिर उसका डर कम हो गया.

सुनैना बहुत प्रयास करती है की वो अकेले बूढ़े के कमरे में ना जाए. और ये शंकर को जब भी मौका मिलता है और सुनैना अकेली होती है उसके कमरे में तो चुदाई के बिना वो उसे जाने नहीं देता है.

आज भी सुनैना ऊपर सीढियों के ऊपर झाड़ू लगा रही थी. शंकर मंदिर से वापस आया. उसने देखा की सुनैना ऊपर ही है तो उसने उसे आवाज दी, बेटा जरा मेरे कमरे में झाड़ू लगा दो.

सुनैना ने कहा, बाबु जी वहां लगा दी मैंने कुछ देर पहले.

शंकर ने आँखे बड़ी कर के प्यारे आवाज में कहा, अरे शायद हवा की वजह से कचरा आ गया है देख लो जरा.

ये जवान लड़की धडकते हुए दिल से अन्दर कमरे में गई. और जैसा की उसे अंदेशा था की वो बुढऊ अन्दर आएगा वैसा ही हुआ. जल्दी से कमरे में घुस के शंकरलाल ने दरवाजे की कुण्डी लगा दी. वो सुनैना के पास आ खड़ा हुआ. सुनैना अपनी आँखों से बूढ़े को देख रही थी और उसका हाथ झाड़ू से चूत गया.

शंकर ने सुनैना के हाथ को अपने हाथ में ले के छाती पर रख दिए. और वो खुद उसकी गांड से उसको पकड के अपने से एकदम करीब ले आया. सुनैना के होंठो के ऊपर उसने ऊपर ऊपर से ही एक किस दी और बोला जल्दी से अपनी साडी खोलो मेरी जान!

सुनैना ने एक पल को तो सोचा की चिल्ला के सब को बता दे की इस बूढ़े के भोले चहरे के पीछे कैसा वहसी शैतान हैं जो उसका सम्भोग वाला भोग वीलास करता है. लेकिन वो ये बखूबी जानती थी की अगर उसने किसी को बताया तो ये बूढा उसे चोर कह के नोकरी से निकलवा देगा और ऊपर से चोरी का धब्बा लगेगा.

बरसो से उसकी पीढियां इस घर में काम करती आई थी. वो सोच रही थी तो क्या मेरी माँ और नानी ने भी ऐसे ही अपनी चूतों से साहब लोगो को खुश किया था.

वो सोचने में बीजी थी और उतने में तो शंकर ने खुद ने उसे उल्टा कर दिया. और सुनैना की साडी को उसने ऊपर कर दिया. पेटीकोट वगेरह को हटा के वो गांड से खेलने लगा. सुनैना पेंटी नहीं पहनती है. शंकर ने अब उसके हाथ से इस जवान कामवाली के बोबे दबाये और अपनी धोती से लंड को बहार निकाल लिया. सुनैना आगे को झुकी हुई थी. और पीछे से शंकर ने अपने लंड को धीरे से गांड पर सहला के फिर चूत की खाई में डाल दिया. सुनैना की सांस अटक गई और उसे बहुत दर्द हुआ.

ये बूढ़े का लंड काफी मोटा था. लम्बाई में नोर्मल लेकिन काफी मोटा था इसलिए पेन हुआ. सुनैना की कमर को पकड के इस बूढ़े ने धक्के लगाने चालु कर दिए. और वो जोर जोर से उसकी चूचियां भी दबा रहा था. सुनैना को बहुत ही दर्द हो रहा था और उसकी आँखों से आंसू भी निकल पड़े थे. लेकिन वो कुछ कह न सकी.

आजतक जितनी बार भी इस बूढ़े ने उसे चोदा था उसे कभी ख़ुशी या मजा नहीं आया. बहुत दर्द होता था उसकी चूत में और आज भी ऐसे ही हुआ. शंकर पुच पुच कर के पांच मिनिट तक सुनैना की टाईट चूत को चोदता गया.

और फिर उसके लंड का पानी इस जवान कामवाली की चूत में ही निकल गया. लंड को निकाल के उसने उसके ऊपर लगे हुए पानी को धोती से साफ किया. और फिर अपने बटवे से २०० रूपये निकाल के सुनैना को पकड़ा के बोला जाओ कुछ ले लेना अपने लिए.

हर बार ऐसे ही होता था, बूढा शंकरलाल चोद के कुछ पैसे सुनैना को दे देता था. और ये लड़की अपनी दुखती हुई चूत के साथ कपडे सही कर के निचे की और चली गई.