कमसिन भांजी की चूत चाट कर चुदाई

दोस्तो, मेरी कहानी कमसिन भांजी की कुँवारी बुर का दूसरा हिस्सा मैं आपके सामने पेश कर रहा हूँ।
मैं जो भी कहानी लिख रहा हूँ उसमें नाम मात्र की भी कल्पना नहीं है, मैं अपने सच्चे निजी अनुभव लिख रहा हूँ।

मेरी भांजी पुष्पा जो स्कूल में पढ़ रही थी और उसी समय मैंने उसकी सील तोड़ दी थी.. यह आपने मेरी पिछली कहानी में पढ़ा।
उसी दिन से हमारा एक जिस्मानी रिश्ता बन गया था। मैं जब भी उसके घर जाता था.. तब वो किसी न किसी बहाने मेरे पास आ जाती थी और उसे मैं अपने आगोश में ले लेता था।

मुझे अब हमेशा उसकी याद सताने लगी थी.. इसीलिए मैं कोई भी बहाना बना कर उसके पास आ जाता था। वो भी मेरी राह देखती थी। हम बातों-बातों में ही एक-दूसरे से बहुत प्यार करने लगे थे।
जब से मैंने उसकी गोरी चूत में अपना काला लंड डाला था.. तब से ही वो मेरी दीवानी बन गई थी।

एक दिन मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी.. मैं हॉस्टल से सीधा शाम को उसके घर के लिए निकल गया। मैं बहुत खुश था.. लेकिन जैसे ही उसके यहाँ पहुँचा.. तब पता चला कि उसके घर उसका चाचा जिसका नाम पप्पू है… वो आया हुआ था।

वो भी बहुत सुंदर तथा हैंडसम था। वो कुछ दिनों के लिए रहने आया था। उसे देखकर मैं थोड़ा परेशान सा हुआ.. क्योंकि उसके रहते हुए मुझे पुष्पा और उसकी करारी चूत चोदने के लिए नहीं मिल सकती थी।

पुष्पा मुझे देखकर खुश हुई.. लेकिन उसने पहले जैसे मेरे पास आकर बातें नहीं कीं।
पुष्पा ने सलवार-कुरता पहना हुआ था.. सुंदर रेशमी कपड़ों में वो बहुत सुंदर गुड़िया सी लग रही थी। लेकिन उसके चाचा ने सब मज़ा खराब कर दिया था।

हमने बहुत सारी बातें कीं.. शाम को जब मेरे जीजा जी आए और रात का खाना खाना खाने के बाद सोने का इंतज़ाम हुआ। तो मेरी दीदी और जीजा जी बाहर आँगन में सोए और एक किनारे उसके चाचा और पुष्पा के लिए पलंग पर सोने का इंतजाम हुआ। मेरे लिए खाट पर गद्दा लगा था।

मैं अकेला ही सोने के लिए मजबूर था.. और उधर पुष्पा भी पलंग पर सोने के लिए चली गई।
वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी, हम एक-दूसरे की ओर देख लेते थे।

मेरे मन की इच्छा ठंडी हो गई.. मेरे लंड को आज उसकी चूत मिलने की आशा ख़त्म हो गई थी।
मैं खाट पर अकेला सोया था.. मुझे आज उसके मम्मे भी दबाने के लिए नहीं मिलने वाले थे।

विशेष बात यही थी कि उसे भी नींद नहीं आ रही थी उसकी चूत भी मेरे लण्ड की खुश्बू लेने को आतुर थी, मुझे भी उसकी चूत में अपना लवड़ा डालने की खुजलाहट हो रही थी।
हम दोनों चुदासवश जाग रहे थे। मैं अपने लंड को सहला रहा था।

बहुत देर बाद घर के सारे लोगों के सो जाने के बाद.. उसके चाचा ने करवट ली और उसके मम्मों पर हाथ रख दिया। इसके साथ ही वो पुष्पा के चूतड़ों के पीछे से सट गया। उसकी बाँहों में पुष्पा थी.. मैं बहुत परेशान हुआ.. मुझे जलन हो रही थी।

पुष्पा ने मेरी तरफ़ देखा.. तब उसे रहा नहीं गया.. वो धीरे से उठी और मेरे पास खाट पर आ गई।
मैंने अपनी बाँहें फैला दीं.. हम एक-दूसरे की बाँहों में समा गए। उसकी पीठ को सहलाते हुए.. उसे मैंने चूमा।

वो भी कब से मेरे लिए प्यासी थी, मेरा माल मेरे हाथ में आ गया, मेरा लंड भी बहुत कड़ा हो गया था।
उसका चाचा सोया पड़ा था, मैं उसकी भतीजी को अपनी बाँहों में भरकर चूम रहा था।

तब मैंने धीरे से उसे खाट पर चित्त लिटा दिया.. उसके बड़े-बड़े चूचों को दबाने लगा। उसके बहुत ही मुलायम तथा गोल-गोल मम्मों को मस्ती से दबा रहा था।
फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उत्तेजित होकर उसकी सलवार नीचे को सरका दी, उसकी गोरी-गोरी रानें तथा चूत का जोड़ साफ नज़र आने लगा।

पहली बार मेरी भांजी पुष्पा ने कहा- मामा लाइट जल रही है.. मरवाओगे क्या?
तब मैं उठा और लाइट को बंद नहीं किया.. बल्कि उठकर बल्ब ही निकाल लाया। कमरे में घुप्प अंधेरा हो गया।
अब मैंने बेफिक्र होकर उसके कुरते को भी निकाल दिया और उसे सिर्फ़ चड्डी तथा ब्रा में ही रहने दिया।

मैंने खाट पर उसे बिठा कर अपनी गोद में ले लिया। इसके पहले ही मैंने भी अपनी पैन्ट और बनियान उतार दिया था।
अब हम दोनों अब सिर्फ़ अंदरूनी कपड़ों में ही थे और हम एक-दूसरे को सहलाने लगे। मेरा लंड उसकी चूत के लिए कब से बेकरार था।
मैंने उसकी चड्डी नीचे खिसकाई और उसको नीचे से पूरी नंगी कर दिया। बहुत हिम्मत लगाकर मैंने यहाँ तक का मुकाम हासिल किया था.. सो मैंने भी समय न गवांते हुआ खुद को नंगा कर लिया।

अपनी मदमस्त भांजी को फिर से चित्त लिटा दिया, मैंने उसकी तंग चूत तथा चिकनी रानों का गहरा चुंबन लिया।
हाय.. क्या मखमली माल था.. वो हाथों के इशारे से मना कर रही थी.. उसे गुदगुदी हो रही थी।

मैंने उसके दोनों पैर अपनी कमर के इर्द-गिर्द डाल लिए और उसकी मक्खन सी चिकनी चूत पर अपने लंड की नोक को टिका दिया और बस सहलाते हुए एक तगड़ा धक्का मार दिया.. एक ही शॉट में आधा लंड उसकी चूत समा गया। उसकी चूत की गर्माहट और चिकनाहट से मेरा आधा लंड सरसराता हुआ अन्दर घुस गया था।

उसकी एक दबी सी आह्ह निकल पड़ी- उई..माम्मा.. जरा धीरे..

मैंने उसके गाल पर मैंने अपने होंठ रख दिए और चूमता हुआ फिर से करारा धक्का मार कर पूरा लंड उसकी चूत में फंसा दिया और उसे चोदने लगा।
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उसकी चूत में जो जन्नत का मज़ा मिला था.. वो मुझे कभी नहीं मिला।
मैं लंड बाहर निकाल कर धक्का मारता तो उसके मुँह से ‘आअहन्..’ सी सीत्कार निकलने लगती थी।
उसकी चूत पूरी तरह पनिया गई थी.. मेरा लंड और उसकी चूत इन दोनों के कामरस से उसकी चूत से चिपचिप तरल बाहर आ रहा था.. पर मुझे सिर्फ महसूस हो रहा था.. दिखाई नहीं दे रहा था।

मैं उसे 20 मिनट तक धक्कापेल चोदता रहा और उसके झड़ते ही मैंने भी अपना ढेर सारा वीर्य उसकी नाज़ुक कोमल चूत को पिला दिया।

हम दोनों शांत हो गए थे.. उसने उठकर अपना सलवार-कुरता पहन लिया।
मैं भी कपड़े पहन कर ठीक हुआ.. तब उसने कहा- अब लाइट जला दो।

मैंने लाइट को ठीक जगह पर लगा कर कमरे में रोशनी कर दी और दोनों एक-दूसरे को बाँहों में लेकर सो गए और सुबह ही उठे।
सुबह उठ कर हमने सभी के सामने सामान्य सा मूड दिखाया और मेरे जीजा जी तथा उसका भाई पप्पू भी जीजा जी के साथ काम पर निकल गया।

मेरी बहन भी खाना बना कर काम पर निकल गई और जाते-जाते पुष्पा को बता गई कि स्कूल जाना।
मुझसे पूछा- तू रुकेगा या जाएगा?
मैंने कहा- दोपहर को जाऊँगा।
दीदी निकल गई।

तब मैंने पुष्पा को बाँहों में जकड़ कर कहा- आज स्कूल मत जाना..

उसने भी चुदाई के लिए मुझे आँख मार दी थी.. जबकि उसने स्कूल की तैयारी कर ली थी.. अपनी चुलबुली चूत पऱ छोटी सी चड्डी और ऊपर से टी-शर्ट पहनी हुई थी। उसके ऊपर फ्रॉकनुमा स्कर्ट.. सफेद मोजे और बूट पहने, उसकी जाँघें बहुत बढ़िया दिख रही थीं.. और उसकी मस्त जाँघें आज भी बहुत बढ़िया हैं।

अब घर के सारे लोग निकल गए.. सिर्फ़ हम दोनों ही घर पर रह गए थे। तब मैंने उसे पलंग के पास बुलाया.. वो इठलाती हुई मेरे नजदीक आई.. मैंने उसका हाथ खींचकर अपनी जाँघों पर बिठा लिया और आगे हाथ ले जाकर से उसके बड़े-बड़े मम्मों को दबाने और मसलने लगा।

उसकी सुंदर गर्दन को चूमने लगा.. मेरी बहन के घर का माल मेरे हाथ में था।

तब मैंने उसे पलंग पर लिटाया.. उसके जूते निकाले और उसका फ्रॉक ऊपर उठा दिया। दिन के उजाले मे उसकी चिकनी जाँघें मेरे सामने थीं।
मैंने उठकर दरवाजा बंद किया.. उसको कामुक नजरों से देखते हुए मैंने अपनी पैन्ट निकाली.. निक्कर निकाली.. अब मेरा काला लंड एकदम तन्नाया हुआ खड़ा था।

मैंने आगे बढ़ कर उसकी चड्डी निकाली, पहली बार मैंने भांजी की चूत पर अपना मुँह रखा.. अपनी जीभ बाहर निकाली.. उसकी चूत की दोनों पंखुड़ियों के बीच जीभ को घुसा दिया और ढेर सारा खारा नमकीन रस चख कर देखा।

बस फिर क्या था वो मुझे चूमने लगी और रात का खेल दिन में ही खुल्लम खुल्ला होने लगा। उसने मेरा लवड़ा चूसा, मैंने उसकी फुद्दी चूसी और बस चूत और लौड़े के मिलन की तैयारी हो गई।

फिर मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखकर.. अन्दर पेल दिया, एक मजे की सिसकारी लेकर उसने मेरा लौड़ा गटक लिया।
मैं उसको आधे घंटे तक चोदता रहा और उसे बहुत मज़ेदार तरह से चोदा।

पूरी मस्ती से चोदने के बाद मैंने अपना वीर्य चूत के बाहर ही गिरा दिया। उस दिन तीन बार हचक कर चुदाई हुई फिर मैं घर से चला गया और वो टाँगें पसार कर सो गई।

अगली कहानी में मैं आपको बताऊँगा कि उसकी गाण्ड भी मैंने ढीली करके खूब चोदी और ढेर सारा वीर्य उसकी चूचियों पर गिराया।