भाबी की बंद नाली खोल कर चुदाई

में पढ़ा कि मैं ग्वालियर शहर से अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर रहा हूँ और किराए पर कमरा लेकर रहता हूँ।

किराए के घरों में अक्सर लोग आते जाते रहते हैं तो ऐसे ही मेरे सामने वाले पोर्शन में एक फैमिली रहने आई, उस फैमिली में एक आदमी, उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे थे.
आदमी केवल रात में सोने को घर आता था और कभी कभी खाना लेने आ जाता था, उसकी कोई दुकान थी पूरा दिन वहीं रहता था।

लेकिन उसकी पत्नी जिसे मैं भाबी कहता था, देखने में एकदम फाडू मतलब खूबसूरत, बड़े बड़े चूचे, उभरा हुआ पिछवाड़ा एकदम सेक्सी फीलिंग देता था। वह थोड़े ग्रामीण परिवेश से थी तो थोड़ी बुंदेली भाषा बोलती थी, पढ़ी लिखी भी थी लेकिन लगता नहीं था कि इंग्लिश से पोस्ट ग्रेजुएट होंगी.
शायद उनके पापा ने जबरदस्ती शादी करवा दी।

मुझसे वह भैया कह कर बुलाती थी तथा कोई काम होता तो मैं कर देता था.
लेकिन मैं उन्हें देखने का मौका नहीं छोड़ता था क्योंकि वो चीज ही ऐसी थी।

 

एक बार हमारा/भाबी के बाथरूम की नाली का पाइप चौक हो गया मतलब बाथरूम का पानी निकल नहीं रहा था. हमारा कॉमन बाथरूम था.

भाबी नहा रही होगी… मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं था। चूँकि बाथरूम की कुण्डी थोड़ी टाइट थी जिसे भाबी ठीक तरह से नहीं लगा पाई होंगी।
मैं कॉलेज से आया था, मुझे बहुत तेज पेशाब लगी थी तो मैंने किताबें रख कर बिना कुछ सोचे समझे झटके के साथ बाथरूम का दरवाजा खोल दिया. अंदर देखा तो भाबी अपनी चूची पर साबुन लगा रहीं थी.
जैसे ही मैंने देखा तो मैं घबरा गया और मेरा पेशाब पेंट में ही छूट गया. जिसे देखकर भाबी बोली- जरा संभल के… कभी कोई लड़की नहीं देखी क्या?
और हँसते हुए दरवाजा बंद कर दिया।
मेरा मूड खराब हो गया और मैंने जबाब दिया- देखी तो है लेकिन ऐसी हालत में नहीं!

मैं अपने कमरे में गया, अपनी पैंट और फर्श साफ करके पढ़ने बैठ गया लेकिन पढ़ने में मेरा मन कहाँ लग रहा था, मेरे दिमाग में तो वही सीन चल रहा था तो मैंने एक लंबी मुठ मारी और सो गया.

थोड़ी देर में भाबी ने मुझे जगाया और बाथरूम के पाइप में डंडा डाल कर नाली खोलने को कहा.
तो मैं उनके साथ मिल कर पाइप में डंडा डालने लगा, मैं उसे जितना अंदर हो सके, घुसा रहा था तो भाभी बोली- थोड़ा अंदर बाहर अंदर बाहर कर दे!
तो मैंने कहा- ठीक है!
और करने लगा.
डंडा पूरा अंदर नहीं जा रहा था तो भाबी बोली- जरा ताकत से जोर जोर से कर न!

तो मैंने भी स्पीड बढ़ा दी, थोड़ी देर मैं पाइप से एक छोटी बॉल शायद उनके बेटे की थी और एक कंडोम निकला जो कचरे से भरा था.
मैंने कहा- तो ये थी दिक्कत!
तो भाबी थोड़ी शर्माने लगी और बोली- और कचरा निकाल!

मैंने और निकाला तो एक और कॉन्डोम निकला तो मैंने कहा- शायद रात में जबरदस्त पार्टी चली है?
तो भाबी मेरे सर पर हल्की सी चमाट मारते हुए बोली- काहे की पार्टी!
मैंने कहा- क्या मतलब?
तो वो बोलीं- कुछ नहीं!
मैं बोला- कुछ तो है?
तो वो बोली- बड़ा शरारती है तू तो?
मैं बोला- भाबी बोलता हूं तो आपसे शरारत नहीं करूंगा तो क्या करूँगा? बताओ न क्या बात है?

तो भाबी वहां से जाने लगीं तो मैं भी पीछे जाने लगा.
बैड पर बैठ कर भाबी बोलीं- अब क्या बताऊँ… कुछ बताने लायक हो तो कुछ न!
तो मैं बोला- फिर भी?
भाबी बोली- तेरे भैया वैसे तो अच्छे हैं लेकिन एक काम में पूरी तरह से कमजोर हैं.

तो मैंने कहा- किस काम में?
वो बोली- बेवकूफ… सेक्स करने में!
तो मैंने कहा- यही हाल यहाँ है… गर्लफ्रेंड बन नहीं रही और बनाना हमको आता नहीं!
वो बोली- चल मैं सिखाऊँ!
मैंने कहा- आप?
तो भाबी बोलीं- इसमें हर्ज क्या है, मेरी भी हेल्प हो जाएगी और तुम्हारी भी!

फिर क्या था… हमारी डील पक्की हुई और बात किसिंग से शुरू होते होते लंबी दनादन चुदाई तक चलती रही.

और उसके बाद जब जिसका मन होता तो टाइम निकालकर फिर शुरू…

बस इस कहानी में इतना ही लिखूंगा, बाकी चुदाई का तरीका तो सब कहानियों में एक सा ही होता है, मैंने भी उसी तरीके से भाबी की चुदाई की तो मैं कुछ लिख नहीं रहा हूँ क्योंकि वो फालतू में टाइम लेती है।