भाभी की चूत को मेरे लंड की सलामी

दोस्तों मेरा नाम अभिज्ञान है और मेरी उम्र अभी 18 साल है, मै आज जो कहानी आपको बताने जा रहा हु वह एक बिल्कुल सच्ची कहानी है और यह कहानी मेरी और हमारे घर पर किराए से रह रही एक भाभी रंजू की है जिसकी उम्र 28 साल के करीब होगी। दोस्तों मै अपने परिवार के साथ कानपूर मै रहता हूँ और हमने अभी कुछ समय पहले एक नया मकान खरीदा था, लेकिन हम अभी भी हमारे पुराने मकान मै ही रह रहे थे और हमारा नया मकान दो मंज़िला है। हमने हमारे मकान का नीचे वाला हिस्सा एक परिवार को किराए पर दे दिया था। उनके परिवार मै चार सदस्य थे भैया, भाभी, उनका बेटा और एक बेटी। भैया फ़ौज़ मै थे तो इसलिए वो हमेशा बाहर अपनी नौकरी पर रहते थे और घर पर सिर्फ़ भाभी और उनके बच्चे ही रहते थे। उनका लड़का जिसकी उम्र 8 थी और लड़की की उम्र 6 साल थी। दोस्तों मेरे परिवार मै मेरे पापा, मेरी मम्मी और मै रहता हूँ। मेरे पापा एक बहुत बड़ी प्राइवेट कम्पनी मै मैनेजर है और मेरी मम्मी एक प्राइवेट स्कूल मै शिक्षिका है। दोस्तों मेरे पापा पूरे सप्ताह घर से बाहर रहते है, वो बस शनिवार और रविवार को घर पर होते है और मेरी मम्मी की भी पास के एक गाँव के स्कूल मै नौकरी है तो वो भी सुबह जल्दी जाकर शाम को 6-7 बजे ही घर पर लौट जाती है और उस समय मै घर पर अकेला रहता हूँ और अब दोस्तों मै अपनी कहानी पर आता हूँ और पूरी विस्तार से आप सभी को सुनाता हूँ।

दोस्तों यह कहानी इसी साल फरवरी की है जब मेरी परीक्षा ख़त्म हो गई थी थे, तब मै अपने घर पर ही रहता था और शाम को बस मै अपनी एक कोचिंग पर ही जाता था और फिर मै पूरा दिन अपने घर पर बैठकर लेपटॉप पर नेट चलाता और सेक्सी फिल्म देखता और गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर सेक्स की स्टोरी पढ़ा करता था उसी समय से ही मुठ मारने लगा था इसलिए मेरे पास पॉर्न फ़िल्मो का एक बहुत अच्छा कलेक्शन था और मेरे लंड का साईज़ उस वक़्त करीब 7 इंच होगा। मुझे अपनी उम्र से बड़ी औरते ज़्यादा पसंद है, क्योंकि पहले मेरी एक गर्लफ्रेंड थी और एक बार मै उसके साथ सेक्स करने की कोशिश करने लगा, लेकिन वो मेरे बिना कुछ किए ही ज़ोर से रोने लगी और मैंने उसे बिना कुछ किए जाने दिया, लेकिन उसके बाद से मै हमेशा समझदार शादीशुदा औरतों पर ज़्यादा ध्यान देता हूँ और उनकी गांड और बूब्स का साईज़ भी पहले से ही बड़ा होता है। अब मै कहानी पर आता हूँ, दोस्तों हमारे यहाँ पर नये किरायेदार आने के बाद और हमे नये घर मै चले जाने की वजह से ऊपर वाली मंजिल पर रहना पड़ा और उस समय सर्दियो का समय था, तो धूप मै बैठने के लिए मै हमेशा छत पर अकेला जाकर बैठ जाता था। एक दिन की बात है मै उस दिन छत पर लेटा हुआ था कि तभी रंजू भाभी छत पर आ गई। दोस्तों मै थोड़ा उनके बारे मै बता दूँ कि उनकी लम्बाई 5.5 फीट होगी, उनका गोरा रंग, वो दिखने मै पतली, लेकिन बूब्स एकदम मोटे मोटे और उनके फिगर का साईज 35-30-38 था। वो हमेशा पटियाला सूट पहनती थी। उन सूट का गला थोड़ा नीचे तक गहरा होता था और बड़े गले के सूट पहनने की वजह से हमेशा भाभी की छाती की लाईन मुझे साफ साफ नज़र आती थी और उनकी सलवार मै उनकी गांड और भी ज़्यादा उभरी हुई नज़र आती थी, इसलिए मै उनकी तरफ बहुत आकर्षित था और मै क्या उनको एक बार देखकर तो किसी बूढ़े का भी लंड खड़ा हो जाए। दोस्तों वो जब उस दिन छत पर आई तो उनके बाल पानी से थोड़े भीगे हुए थे और उनके बाल बहुत काले, घने, लंबे, उनकी गांड तक लटक रहे थे और उनसे पानी टपक रहा था। फिर वो अपने कपड़े सुखाने छत पर आई थी और फिर कपड़े सुखाकर वो नीचे चली गई। आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरा पूरा पूरा ध्यान तब तक उनकी मटकती हुई गांड पर था। तभी अचानक से मेरा ध्यान उनकी सुखाई हुई पेंटी और ब्रा पर गया। मै ब्रा, पेंटी को दूर से देखकर मन ही मन उन्हे चोदने के बारे मै सोचने लगा और कुछ देर बाद मै अपने कमरे मै चला गया और उनके नाम की मुठ मारने लगा और शांत हो गया। दोस्तों उस समय मेरा लंड शांत हुआ था, लेकिन मन नहीं और मै उनको चोदने का विचार करने लगा।
अब मै हर रोज छत पर जाकर सोने लगा और वो भी हर रोज अपने कपड़े सुखाने छत पर आती थी और मै उनकी गांड और बूब्स को चोरी छिपे देखता था और बहुत मज़े किया करता था। फिर एक दिन मेरी अच्छी किस्मत से हमारी ऊपर वाली पानी की टंकी मै नहीं था। दोस्तों मै अक्सर दोपहर के समय नहाता था और भाभी भी घर का सारा काम खत्म करके ही नहाती थी और उन्हे भी अपना काम खत्म करते करते दोपहर हो जाती थी। फिर उस दिन मै जब नहाने के लिए नीचे वाले बाथरूम मै गया तो मैंने देखा कि भाभी नहाकर बाथरूम से बाहर निकली थी और मै उन्हें कुछ देर तक घूरकर देखता रहा। फिर मैंने भाभी से कहा कि भाभी ऊपर वाली टंकी मै शायद पानी नहीं है, अगर आप कहे तो क्या मै नीचे नहा लूँ? भाभी ने कहा कि हाँ नहा लीजिए और मै तुरंत सीधा बाथरूम मै चला गया और जब मैंने अपने कपड़े उतारे तो देखा कि वहां पर भाभी की पर्पल कलर की गीली पेंटी और सफेद कलर की ब्रा लटकी हुई है। मैंने झट से ब्रा, पेंटी को अपने हाथ मै ले लिया और फिर सूंघने लगा।
दोस्तों भाभी की पेंटी का चूत वाला हिस्सा थोड़ा कड़क था और उस जगह पर उनकी झांट के कुछ बाल भी चिपके हुए थे, मै उसे चाटने लगा और अब मेरा लंड एकदम से तनकर खड़ा हो गया। मैंने उनकी ब्रा और पेंटी पर मुठ मारी और उन्हे वैसे ही वहां पर लटका दिया और नहाकर ऊपर चला गया। दोस्तों उस दिन के बाद से भाभी मेरी बातों पर थोड़ा कम ध्यान देने लगी थी, शायद उन्होंने मेरे वीर्य से भरी उनकी वो पेंटी और ब्रा को देख लिया होगा, लेकिन उसके बाद मै हर दिन मौका मिलते ही उनकी सुखी हुई ब्रा और पेंटी पर मुठ मारने लगा। कुछ दिनों से भाभी का व्यहवार भी बहुत बदला हुआ था। अब मैंने सोचा कि आगे कैसे बढ़ा जाए तो मैंने एक प्लान बनाया और उस दिन मैंने अपना ट्राउज़र नीचे से थोड़ा फाड़ लिया और फिर छत पर अपनी एक किताब से अपना चेहरा ढककर सोने का नाटक करने लगा और अपने लंड को खड़ा करके उस फटी हुई ट्राउज़र से पूरा बाहर निकाल दिया।आप ये कहानी गुरुमास्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

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